न्यूरालिंक: मानवता की नई क्रांति की ओर एक कदम
एक नई युग की शुरुआत
न्यूरालिंक, एलॉन मस्क की उद्देश्यशील कंपनी, ने मानवता के लिए एक नई क्रांति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इस कंपनी का मुख्य उद्देश्य है ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) के माध्यम से मानव मस्तिष्क को सीधे तकनीकी उपकरणों से जोड़ना ।लिंक - एक चमत्कारी डिवाइस।
न्यूरालिंक ने इंसानी दिमाग में लगाई चिप जिसका नाम लिंक रखा गया है ,मिशन को पूरा करने के लिए "लिंक" नामक एक डिवाइस पेश किया है, जिसे सर्जरी के माध्यम से मानव मस्तिष्क में स्थापित किया जा रहा है। यह डिवाइस ब्रेन और तकनीकी उपकरणों के बीच सीधा संवाद स्थापित करेगा, जिससे विभिन्न न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में सुधार हो सकता है।
लिंक डिवाइस को मानव मस्तिष्क में कैसे इनस्टॉल किया जाएगा ?
कंपनी ने बताया कि लिंक पर थ्रेड इतने महीन और लचीले होते हैं कि उन्हें मानव हाथ से नहीं डाला जा सकता। इसके लिए कंपनी ने एक रोबोटिक सिस्टम डिजाइन किया है। यह थ्रेड को मजबूती से और कुशलता से इम्प्लांट कर सकेगा।
इसके साथ ही न्यूरालिंक ऐप भी डिजाइन किया गया है। ब्रेन एक्टिविटी से सीधे अपने कीबोर्ड और माउस को बस इसके बारे में सोच कर कंट्रोल कर सकते हैं।
डिवाइस को चार्ज करने की भी जरूरत होगी। इसके लिए कॉम्पैक्ट इंडक्टिव चार्जर डिजाइन किया गया है जो बैटरी को बाहर से चार्ज करने के लिए वायरलेस तरीके से इम्प्लांट से जुड़ता है।क्या इसे लगाना सेफ होगा?
चिप इम्प्लांट करने में हमेशा जनरल एनेस्थीसिया से जुड़ा रिस्क होता है। ऐसे में प्रोसेस टाइम को कम करके रिस्क कम किया जा सकता है। कंपनी ने इसके लिए न्यूरोसर्जिकल रोबोट डिजाइन किया है, ताकि यह बेहतर तरीके से इलेक्ट्रोड को इम्प्लांट कर सके।इसके अलावा, रोबोट को स्कल (खोपड़ी) में 25 मिमी डायमीटर के एक छेद के जरिए थ्रेड डालने के लिए डिजाइन किया गया है। ब्रेन में एक डिवाइस डालने से ब्लीडिंग का भी रिस्क है। कंपनी इसे कम करने के लिए माइक्रो-स्केल थ्रेड्स का उपयोग कर रही है।
एलन मस्क की पोस्ट।
हाल ही में एलन मस्क की , ट्विटर जिसे वर्तमान में एक्स नाम दिया गया है पर पोस्ट आई और उसमें उन्होंने कहा जिस व्यक्ति के मस्तिष्क में यह चिप डाली गई है वह परीक्षण सफल रहा है वह व्यक्ति जल्दी रिकवर हो रहा है
एलन मस्क ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, 'इस डिवाइस के जरिए आप सोचने मात्र से फोन, कंप्यूटर और इनके जरिए किसी भी अन्य डिवाइस को कंट्रोल कर पाएंगे। शुरुआती यूजर वो होंगे जिनके लिंब्स यानी अंगों ने काम करना बंद कर दिया है।'
इस तकनीक से मानव किन नई ऊंचाइयों को छूएगा?
न्यूरालिंक की उम्मीदें हैं कि इस तकनीक से अकेलेपन, पैरालिसिस, और दृष्टिहीनता जैसी समस्याएं सुधारी जा सकती हैं, और लोगों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की जा सकती है। एक सशक्त ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के माध्यम से, लोग अपने विचारों को सीधे तकनीकी उपकरणों के माध्यम से पहुंचा सकते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली में सुधार हो सकता है।न्यूरालिंक ने कहा, हमारी तकनीक का प्रारंभिक लक्ष्य पैरालिसिस वाले लोगों को कंप्यूटर और मोबाइल डिवाइसेस का नियंत्रण देना है। हम उन्हें इंडिपेंडेंट बनाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि हमारी डिवाइस के जरिए ऐसे लोग फोटोग्राफी जैसी अपनी क्रिएटिविटी भी दिखा सकें। इस तकनीक में कई सारे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का इलाज करने की क्षमता है।
हुआ सफल ट्रायल
सितंबर 2023 में, न्यूरालिंक ने अपने पहले ह्यूमन ट्रायल के लिए मंजूरी प्राप्त की है, जिसमें सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड की चोट या ALS के कारण क्वाड्रिप्लेजिया वाले लोगों को शामिल किया जाएगा। इस अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य है इस नई तकनीक के द्वारा लोगों को सुधारित जीवन देना।
चुनौती और भविष्य
न्यूरालिंक की इस क्रांति में होने वाले सफलता और चुनौतियों का सामना करना होगा। इस डिवाइस की सफलता के बाद, और भी अधिक सुधारित और उन्नत वर्शन को विकसित करने का प्रयास किया जा सकता है, जिससे मानवता को नई स्तर पर पहुंचाया जा सके।न्यूरालिंक का यह प्रयास एक सराहनीय कदम है जो मानव जीवन को एक नए दृष्टिकोण से देखने की दिशा में है।
एक बंदर ने टेलीपैथी के जरिए टाइपिंग की
मस्क ने हाल ही में न्यूरालिंक के कैलिफोर्निया हेडक्वार्टर में आयोजित 'शो एंड टेल' इवेंट में अपनी इस तकनीक की प्रगति को साझा किया। इस इवेंट में, एक बंदर ने टेलीपैथी के जरिए टाइपिंग की और वीडियो में मस्क ने बिना जॉयस्टिक का इस्तेमाल किए एक बंदर को पिनबॉल खेलते हुए दिखाया। इसके साथ ही, न्यूरालिंक टीम ने इस इम्प्लांटेशन रोबोट के साथ सर्जिकल प्रक्रिया को भी डेमॉन्सट्रेट किया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे रोबोट सर्जरी को सफलता से पूरा करता है।
Conclusion
न्यूरालिंक, एलॉन मस्क के नेतृत्व में चल रही इस तकनीकी क्रांति ने मानव मस्तिष्क को और एक स्तर पर ले जाने की पहल की है। इस इंटरफेस के माध्यम से ब्रेन और कंप्यूटर के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का उद्देश्य रखा गया है, जिससे विभिन्न न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में सुधार किया जा सके।
न्यूरालिंक की उम्मीदें हैं कि इस तकनीक से विभिन्न रोगों जैसे अकेलेपन, पैरालिसिस, और दृष्टिहीनता को सुधारा जा सके, और लोगों को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की जा सके। एक प्रेरणादायक बात यह है कि इस तकनीक के प्रथम परीक्षण में सफलता मिल रही है और लोग इससे उच्चतम स्तर की सोचने और कार्रवाई करने की क्षमता प्राप्त कर सकते हैं।
इस प्रयास से हम देख सकते हैं कि भविष्य में न्यूरालिंक के इम्प्लांटेशन रोबोट और तकनीकी विकास से मानवता को नई संभावनाएं मिल सकती हैं जो पहले असम्भावित थीं।
